गुरुवार 13 अगस्त 2026 - 08:16
जब तक जन्नतुल बक़ी में रौज़ा नहीं बनता, हमारी तहरीक जारी रहेगी।मौलाना महबूब मेंहदी आबिदी नजफ़ी

हौज़ा / मौलाना असलम रिज़वी,अब समय आ गया है कि सभी लोग मिलकर जन्नतुल बक़ी के पुनर्निर्माण की मुहिम में शामिल हों।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , मुंबई में हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ और इमाम हसन अ.स.की वफ़ात व शहादत की याद में अल-बक़ी ऑर्गनाइज़ेशन, शिकागो (अमेरिका) की ओर से एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन मौलाना महबूब मेहदी आबिदी नजफ़ी ने की।

अलबक़ी ऑर्गनाइज़ेशन के प्रमुख मौलाना महबूब मेहदी आबिदी नजफ़ी ने रसूल-ए-अकरम स.ल.व. और इमाम हसन अ. की शहादत की याद में पूरी दुनिया के मुसलमानों को ताज़ियत पेश करते हुए कहा कि मैं इस समय कर्बला में हूँ, जहाँ आम तौर पर यह नारा लगाया जाता है, “वल्लाहि या ज़हेरा, मा नन्सा हुसैना” यानी ऐ फ़ातिमा ज़हेरा! ख़ुदा की क़सम, हम आपके हुसैन को कभी नहीं भूल सकते।

उन्होंने कहा कि कर्बला-ए-मुअल्लाह में जब इमाम हुसैन अ.स. का खूबसूरत हरम और रौज़ा सामने आता है तो दिल को बहुत सुकून मिलता है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी सामने आता है कि उन्हीं के बड़े भाई इमाम हसन अ.स. का रौज़ा जन्नतुल बक़ी में किस तरह ढहा दिया गया और आज वहाँ एक छोटा-सा चिराग भी नहीं जलता।

उन्होंने इसे इमाम हसन अ.स. और बक़ी में दफ़्न अन्य हस्तियों पर बड़ा ज़ुल्म बताते हुए कहा कि सभी लोगों को इस आंदोलन से जुड़कर अपनी आवाज़ बुलंद करनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि इंशाअल्लाह जल्द ही जन्नतुल बक़ी में एक खूबसूरत रोज़ा बनाया जाएगा।

सुन्नी विद्वान ने भी समर्थन का ऐलान किया
अहले सुन्नत वल-जमाअत की ओर से प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन और चिश्ती सिलसिले की प्रतिष्ठित शख्सियत मौलाना मुहम्मद मुईनुद्दीन चिश्ती ने कहा कि यह बेहद अफ़सोस की बात है कि उन लोगों की कब्रों और मज़ारों को ढहा दिया गया जिन्होंने इंसानियत और इस्लाम की सेवा की थी।

उन्होंने कहा कि इमाम-ए-आज़म हज़रत अबू हनीफ़ा, इमाम जाफ़र सादिक़ अ. के शागिर्द रहे हैं, लेकिन बक़ी में उनके उस्ताद के रोज़े को भी ढहा दिया गया। उन्होंने इस अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अहले-बैत अ. के ढहाए गए रोज़ों के पुनर्निर्माण की मांग की और बक़ी के लिए उठने वाली हर आवाज़ का समर्थन करने का ऐलान किया।

मौलाना मिर्ज़ा आबिद अली का बयान
आयतुल्लाह शेख़ मुहम्मद याक़ूबी के भारत में प्रतिनिधि मौलाना मिर्ज़ा आबिद अली ने कहा कि इमाम हसन अ.स. ने उस समय भी मुनाफ़िक़ों के चेहरों से पर्दा हटाया था और आज उनका ढहाया गया रोज़ा भी मुनाफ़िक़ाना रवैये को उजागर कर रहा है।

उन्होंने कहा कि क़ुरआन के अनुसार इमाम हसन अ. रसूल-ए-अकरम स.ल.व. के बेटे के समान हैं। ऐसे में कोई व्यक्ति पिता से मोहब्बत करे और बेटे से दुश्मनी रखे, यह कैसे संभव है? उन्होंने कहा कि जब जन्नतुल बक़ी में रोज़ा बनाया जाएगा तो वहाँ दुआएँ होंगी और अल्लाह की इबादत की जाएगी।

मौलाना मिर्ज़ा जाफ़र अब्बास का संदेश
लखनऊ से मौलाना मिर्ज़ा जाफ़र अब्बास ने कहा कि रसूल स.ल.व. के नवासे को शहीद करने वाले लोग ज़ाहिरी तौर पर मुसलमान थे। जब हम कहते हैं कि मुसलमानों ने इमाम हुसैन अ. को शहीद किया तो कुछ लोग सवाल करते हैं कि कोई मुसलमान रसूल के नवासे की क़ब्र कैसे ढहा सकता है?

उन्होंने कहा कि जन्नतुल बक़ी मदीना में है और वहाँ के शासक भी मुसलमान थे, फिर भी बक़ी को ढहा दिया गया। इसलिए यह बात समझने की ज़रूरत है कि केवल मुसलमान कहलाना किसी व्यक्ति को अहले-बैत अ. के प्रति मोहब्बत रखने वाला साबित नहीं करता।

मुहम्मद रज़ा आबिदी नजफ़ी ने आंदोलन की सफलता को बताया,भारत में अल-बक़ी ऑर्गनाइज़ेशन, शिकागो के सक्रिय सदस्य मुहम्मद रज़ा आबिदी नजफ़ी ने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक जन्नतुल बक़ी की मज़लूमियत के बारे में बहुत कम लोग जानते थे। लेकिन मौलाना महबूब मेहदी आबिदी की सरपरस्ती में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भारत में मौलाना असलम रिज़वी तथा मौलाना अली अब्बास वफ़ा की कोशिशों से यह आंदोलन घर-घर तक पहुँच गया है।

पंडित विजय कुमार शर्मा ने भी समर्थन किया
दिल्ली के प्रसिद्ध समाजसेवी और इमाम हुसैन अ. के श्रद्धालु पंडित विजय कुमार शर्मा ने कहा कि मैं एक हिंदू होकर आज यह घोषणा करता हूँ कि जन्नतुल बक़ी में ढहाए गए रोज़ों का पुनर्निर्माण होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह कितने अफ़सोस की बात है कि मौला अली अ.स. की पत्नी से संबंधित क़ब्र को ढहा दिया गया और उसका पुनर्निर्माण नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जहाँ हथियारों पर भारी धन खर्च किया जाता है, वहीं रसूल स.ल.व. के घराने से संबंधित ढहाए गए मज़ारों के पुनर्निर्माण के लिए ध्यान नहीं दिया जाता। उन्होंने जन्नतुल बक़ी के लिए चल रही इस मुहिम का समर्थन करते हुए कहा कि वह अंत तक इस आंदोलन से जुड़े रहेंगे।

मौलाना असलम रिज़वी का ऐलान किया अल-बक़ी ऑर्गनाइज़ेशन के महत्वपूर्ण सदस्य मौलाना असलम रज़वी ने पुणे से अपने संबोधन में कहा कि जन्नतुल बक़ी का मुद्दा अब किसी एक देश तक सीमित नहीं रहा है। दुनिया भर में इंसाफ़ पसंद लोग इसके पुनर्निर्माण के लिए आवाज़ उठा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि दुनिया के हालात बदल रहे हैं और हमें विश्वास है कि भविष्य में परिस्थितियाँ मोमिनों के लिए बेहतर होंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इंशाअल्लाह जन्नतुल बक़ी में एक खूबसूरत रोज़ा पुनः निर्मित होगा।

कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध मद्दाह-ए-अहले-बैत साहिल आरिफ़ी ने अय्याम-ए-अज़ा की मुनासिबत से बारगाह-ए-इस्मत व तहारत में अपने कलाम के माध्यम से श्रद्धांजलि पेश की।
यह सफल अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस एसएनएन चैनल पर लाइव प्रसारित की गई। कार्यक्रम का नेतृत्व एसएनएन चैनल के एडिटर-इन-चीफ़ मौलाना अली अब्बास वफ़ा ने किया, जबकि चैनल के एडिटर काशिफ़ साहब ने कार्यक्रम की निगरानी की।

जब तक जन्नतुल बक़ी में रौज़ा नहीं बनता, हमारी तहरीक जारी रहेगी।मौलाना महबूब मेंहदी आबिदी नजफ़ी

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